ये जिद्दी शिक्षा का पहल पोस्ट है इसे सिर्फ डेमो के उद्देश्य से लिख रहा हूँ।
1. “मिल जाएगी मंजिल भटक कर ही सही गुमराह तो वो लोग है जो घर से निकले ही नहीं ।”
- अर्थ: लेखक का कहना है कि जीवन में लक्ष्य तक पहुँचने के लिए रास्ते से भटकना या गलतियां करना स्वाभाविक है। इसका मतलब है कि कोशिश करना और रास्ता खोजना, भले ही उसमें समय लगे, कुछ न करने से कहीं बेहतर है। असली भटकाव तो उन लोगों का है जो डर के कारण या आलस्य के कारण कभी कोशिश ही नहीं करते।
2. “न संघर्ष न तकलीफ तो क्या खाक मजा है जीने में बड़े – बड़े तूफ़ान थम जाते है जब आग लगी हो सीने में ।”
- अर्थ: इस बात का मतलब है कि जीवन का असली सुख और आनंद सिर्फ आराम में नहीं, बल्कि चुनौतियों का सामना करने और उनसे उबरने में है। कठिनाइयाँ हमें मजबूत बनाती हैं और जब हम किसी मुश्किल को पार करते हैं, तो हमें संतोष और खुशी की गहरी भावना मिलती है।
3 . “खुश रहना सबसे मुश्किल काम है, और इसलिए जब भी मौका मिले खुश हो जाना चाहिए।”
- अर्थ: यह दर्शाता है कि दुनिया की भाग-दौड़ में हमेशा खुश रहना आसान नहीं होता। इसलिए, जब भी जीवन में खुशी का कोई छोटा सा भी पल मिले, जैसे कोई अच्छी खबर, कोई हंसी-मजाक या कोई संतोषजनक काम, तो हमें उसे पूरी तरह से महसूस करना चाहिए और उसका आनंद लेना चाहिए।
4 . “अपनी ताकत को पहचानो और अपने क्षेत्र में महारत हासिल करो।”
- अर्थ: लेखक यहाँ आत्म-ज्ञान (self-awareness) की बात कर रहे हैं। वे हमें सलाह देते हैं कि हमें अपनी क्षमताओं, प्रतिभाओं और शक्तियों को पहचानना चाहिए। जब हम अपनी ताकत जान लेते हैं, तो हमें उस क्षेत्र में विशेषज्ञ बनने पर ध्यान देना चाहिए जिसमें हम सबसे अच्छे हैं।
5 . “दिमाग को बेवकूफ बनाकर पहले काम और फिर आराम करो।”
- अर्थ: यह एक बहुत ही व्यावहारिक सलाह है। इसका मतलब है कि अक्सर हमारा दिमाग हमें आराम करने या टालमटोल करने के लिए बहकाता है। इस पर काबू पाने के लिए, हमें जानबूझकर पहले अपने काम को पूरा करना चाहिए, और उसके बाद ही आराम या मनोरंजन के बारे में सोचना चाहिए। यह तरीका हमें अधिक अनुशासित और सफल बनाता है।
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