जिद्दी शिक्षा - Jiddi Shiksha
Master Manikant

मास्टर मणिकांत

संस्थापक, जिद्दी शिक्षा

जिद्दी शिक्षा की कहानी — संस्थापक की जुबानी

परिचय

हर बड़ी शुरुआत एक छोटे से विचार से होती है। जिद्दी शिक्षा की कहानी भी ऐसी ही है — एक ऐसे व्यक्ति की सोच से शुरू हुई, जिसने ठान लिया कि वह पढ़ाई को सबके लिए आसान बनाएगा। यह कहानी है मास्टर मणिकांत की जुबानी।

शुरुआत कैसे हुई

मुझे यह महसूस हुआ कि आज के डिजिटल युग में भी छात्रों को सही स्टडी मैटेरियल ढूंढने में दिक्कत होती है। कई बार सामग्री ऑनलाइन मिलती ही नहीं या फिर महंगी किताबें खरीदनी पड़ती हैं। मैंने तय किया कि ऐसा प्लेटफॉर्म बनाऊँ जहाँ सारी जरूरी सामग्री एक ही जगह मिल सके।

"जिद्दी शिक्षा" नाम क्यों रखा

"जिद्दी" शब्द का अर्थ है — जो हार नहीं मानता। मेरा मानना है कि अगर कोई काम ठान लो, तो वह ज़रूर पूरा होता है। यही सोच इस प्लेटफॉर्म की नींव बनी। जिद्दी शिक्षा सिर्फ नाम नहीं, एक सोच है — कि मेहनत और लगन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

लक्ष्य और उद्देश्य

हमारा उद्देश्य है — कठिन से कठिन विषयों को सरल बनाना और छात्रों को ज़रूरी सामग्री आसानी से उपलब्ध कराना। यह एक टीम आधारित प्लेटफॉर्म है, जहाँ प्राथमिक भाषा हिंदी है, और आवश्यक स्थानों पर अंग्रेज़ी का भी उपयोग किया जाता है। भविष्य में इसे पूरी तरह अंग्रेज़ी में लाने की योजना है।

आगे का रास्ता

जिद्दी शिक्षा सिर्फ मेरे लिए नहीं, बल्कि हर उस विद्यार्थी के लिए है जो समझदारी से पढ़ना चाहता है। जैसे-जैसे और लोग जुड़ेंगे, हमारा मिशन भी बढ़ेगा — ऑफलाइन ज्ञान को ऑनलाइन लाना और पढ़ाई को आसान बनाना।

निष्कर्ष

जिद्दी शिक्षा केवल एक वेबसाइट नहीं, बल्कि एक आंदोलन है — जिद्द और ज्ञान का। यह साबित करता है कि जब इरादा मजबूत हो, तो मेहनत से बदलाव लाया जा सकता है।

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